उत्तर ईशान दिशा ( NNE)

प्राचीन वैद्य आयुर्वेद की जनक भगवान धनवंतरी महाराज की जयंती पर आप सभी देशवासियों को हार्दिक दिल से शुभकामनाएं।
 (सेहतमंद एवं स्वस्थ रहें)।

उत्तरईशान दिशा ( NNE )
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 हमारे घर में यह एक ऐसा दिशा है जो सीधे-सीधे हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। यह दिशा हमारे रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। इस दिशा में हम अपने दवाई रख सकते हैं। इस दिशा में बैठकर डॉक्टर यदि अपने मरीज को परामर्श देता है तो उसके बातों से ही, उसके ओरा से ही मरीज को सकारात्मक का अनुभव होता है। और स्वास्थ्य जल्दी ठीक होता है। यदि आपके घर पर कोई सदस्य बहुत ज्यादा बीमार हो तो कुछ दिन उसके लिए इस दिशा में सोने की व्यवस्था कर दे। साथ ही उसकी दवाइयां को भी इसी दिशा में रखें। इससे उसके स्वास्थ्य में जल्दी सुधार होगा यदि यह दिशा वास्तु सम्मत हो तो घर के सदस्य स्वस्थ रहते हैं।
 लेकिन यदि इस दिशा में वास्तु दोष हो जैसे की यहां टॉयलेट है, सेप्टिक टैंक है, किचन है, यह दशा बहुत ज्यादा घटा है या बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ है, इस दिशा में बिजली के उपकरण है, इस दिशा में अग्नि तत्वों के रंग है। इस दिशा में कूड़ा-कचरा है। इस दिशा में आप अपना स्टोर रूम बनाए हुए हैं। इस दिशा में गंदगी रखते हैं। इस दिशा में झाड़ू रखते हैं। इस दिशा में डस्टबिन रखते हैं। यह दिशा कटा हुआ है। इस दिशा में त्रिकोण युक्त सामान रखते हैं। ऐसे ही और भी वास्तु दोष हो तो यह दिशा दूषित हो जाता है। जिसके कारण घर के सदस्यों को स्वास्थ्यगत समस्या आते रहता है। एक बीमारी ठीक हुआ नहीं कोई दूसरा बीमारी पकड़ लेता है। घर के अधिकांश का धन बीमारियों में ही खर्च हो जाते हैं।
  यदि आपका बच्चा डॉक्टर बनना चाहता है, ज्योतिष बनना चाहता है, वास्तुविद बनना चाहता है, मोटिवेशनल का कार्य करना चाहता है। या फिर यह कार्य कर रहा है, तो उसे इस दिशा की ऊर्जाओं को ग्रहण करना चाहिए। जिसके लिए उसे इस दिशा के रूम में दो-तीन घंटा अवश्य ही व्यतीत करना चाहिए। जिससे कि उसका प्रभामंडल ऊर्जा में पॉजिटिव ऊर्जा का संचार हो और लोगों के लिए सहायक सिद्ध हो सके। साथ ही इस ऊर्जा के प्रभाव से अपने प्रोफेशन में सफलता प्राप्त कर सके। अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सके।
 लेकिन याद रखें यदि आपका बच्चा में डॉक्टर बनने के गुण नहीं है और जबरदस्ती आप उसे इस दिशा में पढ़ने का रूम देते हैं तो कोई भी लाभ प्राप्त नहीं होगा। मात्र स्वास्थ्य ही सही रहेगा। इसलिए सबसे पहले यह देखें कि आपके बच्चे में क्या बनने का गुण है वह क्या बनना चाहता है। इसके बाद ही उसे उसके प्रोफेशन के हिसाब से, उसके सपनों के हिसाब से, उसके रुचि के हिसाब से, उसे उस दिशा का रूम में पढ़ने के लिए व्यवस्था करें। ताकि उसकी प्रतिभा निखर कर सामने आए।
अतः इस दिशा को वास्तु संमत् बनाने की हमेशा कोशिश करें।
✍️ Raajeshwar Adiley


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