रोहिणी नक्षत्र: विस्तृत जानकारी
रोहिणी नक्षत्र वृषभ राशि में 10° से 13°20' तक स्थित है। यह आकाश में 5 तारों से बना है, जिसका स्वरूप एक गाड़ा (शकट) जैसा प्रतीत होता है। यह जनवरी महीने में रात 9:00 से 11:00 बजे के बीच स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
रोहिणी नक्षत्र का स्वभाव रोहिणी नक्षत्र में जन्मे जातकों का स्वभाव मृदु और प्रसन्नचित्त होता है।
प्रमुख गुण: प्रकृति प्रेमी और सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार। ललित कला, साहित्य, और संगीत में गहरी रुचि।
सत्यवादी, मिष्ठभाषी, और स्थिर मस्तिष्क। आकर्षक व्यक्तित्व और परोपकारी स्वभाव।
ईमानदार, लेकिन कभी-कभी विषय-वासना और परस्त्रीगमन का प्रभाव हो सकता है।
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रोहिणी नक्षत्र और व्यवसाय इस नक्षत्र में जन्मे जातक निम्न व्यवसायों में सफलता प्राप्त करते हैं:
खाद्य एवं पेय: होटल, रेस्तरां, फल, दूध, डेयरी, आइसक्रीम।औद्योगिक उत्पाद: पेट्रोल, ऑटोमोबाइल, तेल, कांच, प्लास्टिक।
सजावटी वस्तुएं: साबुन, सेन्ट, चंदन, रंग-रोगन। जल आधारित कार्य: जलीय पदार्थ, जलयान, नौ-सेना।
कला और साहित्य: नृत्य, संगीत, ललित कला, ज्योतिष, पंडिताई। अन्य: प्रॉपर्टी डीलर, विवाह ब्यूरो, वकील, न्यायाधीश।
रोहिणी नक्षत्र और स्वास्थ्य इस नक्षत्र में जन्मे जातकों को स्वास्थ्य से जुड़ी निम्न समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है:
गले में सूजन, घेंघा, शीत ज्वर। कफ, सिरदर्द, टॉन्सिल, तालू दर्द। पैरों में दर्द, छाती में दर्द (स्त्रियों के लिए)।
अनियमित मासिक धर्म, रक्तस्राव, और कुक्षिशूल।
वीडियो में और जानें: रोहिणी नक्षत्र की जानकारी वीडियो
https://youtu.be/4zWUWnNO5xU?si=ZIUObZo5UAX468m_
रोहिणी नक्षत्र के प्रमुख तत्व:
राशि स्वामी: शुक्र नक्षत्र स्वामी: चंद्र देवता: प्रजापति रंग: हल्का पीला
तत्व: पृथ्वी वर्ण: वैश्य योनि: सर्प गण: मनुष्य नाड़ी: अंत्य
रोहिणी नक्षत्र और साधना उपासना रोहिणी नक्षत्र के चार चरणों के अनुसार साधना करने से उत्तम लाभ प्राप्त होते हैं:
प्रथम चरण (स्वामी: मंगल): मंत्र: ॐ नमः शिवाय।
द्वितीय चरण (स्वामी: शुक्र): मंत्र: मृत्युंजय मंत्र।
तृतीय चरण (स्वामी: विष्णु): साधना: विष्णु उपासना।
चतुर्थ चरण (स्वामी: सूर्य): मंत्र: सूर्य मंत्र।
विशेष सुझाव: माधव मास में गंगा या यमुना स्नान करना शुभ।
इन नक्षत्रों में शुभ कार्य करने से बचें: रोहिणी, हस्त, और श्रवण।
साधना के लिए उपयुक्त समय: नक्षत्र संचरण के अनुसार समय का चयन करें।
रोहिणी नक्षत्र की विशेषता: यह नक्षत्र जीवन में स्थिरता, आकर्षण, और सृजनात्मकता का प्रतीक है। रोहिणी में जन्मे जातकों के लिए चंद्र और शुक्र की उपासना विशेष लाभकारी मानी जाती है।
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ज्योतिषाचार्य प्रो. कार्तिक भाई शास्त्री: संक्षिप्त परिचय
संपादक: मधुर गुजरात साप्ताहिक समाचार पत्र (1999 से)
प्रकाशक: मधुर पंचांग (2005 से)
अध्यक्ष: वेदशास्त्र एस्ट्रो (अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष सलाहकार) - 1999 से
सचिव: अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष फाउंडेशन
कोषाध्यक्ष: शिव शक्ति चैरिटेबल ट्रस्ट और एजुकेशन ग्रोथ सोसाइटी
पंजीयक: महर्षि वेदव्यास अकादमी (भारत)
अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष सलाहकार और वास्तुशास्त्री
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