भगवान चंद्रमा अत्रि गौत्रीय हैं। यमुन देश का स्वामी है। उसका शरीर अमृतमय है। दो हाथ हैं। एक हाथ में वरमुद्रा और दूसरे हाथ में गदा है। दूध के समान सफ़ेद शरीर पर श्वेत वस्त्रो, माला और अनुलेपन धारण करते है । मोती का हार है।
अपनी सुधामयी किरणों से तीनों लोकोंका सिंचन कर रहे है। दस घोड़ो के त्रिचक्र रथ पर सवार हो कर सुमेरु की प्रदक्षिणा कर रहे है। चन्द्रमा के अधिदेवता उमादेवी और प्रत्यधिदेवता जल है। Know the importance and worship of the moon house
चंद्र मंत्र
(ॐ क्लीं सोमय नमः) ह्रीं सोमय नमः जितने मंत्रो का जाप होता है उसका दशांश हवन किया जाता है। हवन में चंद्र के लिए पलाश समिधा का प्रयोग होता है। https://allso.in/ https://vivahallso.com/ http://adweb.lovestoblog.com/?i=1
जो दधि, शंख तथा हिम की आभावाले क्षीरसमुद्र से प्रादुर्भूत, भगवान शंकर के शिरोभूषण तथा अमृतस्वरूप चन्द्रमा को मैं नमस्कार करता हूँ। चंद्र ग्रह स्त्री जाति, श्वेतवर्ण, चंचल, जलीय प्रकृति और वायव्य दिशा का अधिष्ठाता है। चंद्र मन , चित्तवृत्ति, स्वस्थ्य, संपत्ति, अनुग्रह और मातृ सुख का कारक है। उसके देवता जल है और ऋतु वर्षा है। चंद्र से जलीय रोग, कफ, पांडुरोग(पीलिया), मानसिक रोग, उदारता तथा मस्तक का विचार होता है। कृष्णपक्ष की षष्ठी तिथि से शुकलपक्ष की षष्ठी तक का चंद्र पाप ग्रह माना जाता है। अन्य तिथि में शुभ माना जाता है।
शुभ चंद्र चतुर्थ भाव में सम्पूर्ण फल देता है। कर्क राशिका स्वामी है। चंद्र एक राशि में सवा दो दिवस तक रहता है। चंद्र का भाग्योदयवर्ष २४ है। चंद्र की अष्टोत्तरी महादशा १५ वर्ष और विंशोत्तरी महादशा १० वर्ष की होती है। चंद्र ग्रह काल पुरुष का मन है । चंचल, कल्पनाशील, भावुक, विविधता, ईमानदार, शांत, माता और मन का कारक है। सार्वजनिक कार्य, साहित्य सर्जन, मौलिकता, कफ, निद्रा, चांदी, गन्ना(ईख), मोती, नमक, दही, चावल, कुआ, तालाब, बावड़ी वगेरे का कारक है। https://allso.in/ https://vivahallso.com/ http://adweb.lovestoblog.com/?i=1
समुद्र में उत्त्पन्न होनेवाली वस्तुए मछली, मोती, शंख सम्बंधित कार्य, दूध की बनावट, बर्फ, ठन्डे-पेय, रसायण, आइसक्रीम, मदिरा, पेट्रोल, परिचारिका, फोटोग्राफर, भरत-गुंथन कार्य, स्त्री रो ग निष्णांत, आयात-निकास, कलाकार, अगरबत्ती और सुगन्धित पदार्थो का कार्य चंद्र व्यवसायों में शामिल होते है। चन्द्रमा के शुभ प्रभाव में हंसमुख, बुद्धिमान, चंचल, विचार व्यक्त करने में तेज, जिज्ञासु, वर्तमान में जीने वाला, व्यर्थ की मनमानी और झगड़ों से बचने वाला होता है। Know the importance and worship of the moon house
चंद्र की शुभ असरो में प्रमादी, भटकता हुआ, मुर्ख, असंतुष्ट, भविष्य का न विचारने वाला, कामचोर, निर्लज्ज भाषा का प्रयोग करने वाला । चंद्र पृथ्वी का उपग्रह है। चंद्र ग्रहों में रानी कहलाता है। सूर्य के बाद का सबसे महत्त्व का ग्रह है। शुकल पक्ष में उसकी कलाएं बढाती है। कृष्णपक्ष में उसकी कलाएं घटती है। चन्द्र वायव्य कोण का स्वामी है। उत्तर दिशा और कुंडली के चौथे भाव में बलवान बनता है। उसका रत्न मोती है। धातु चांदी है। चंद्र का चौघड़िया अमृत है और वार सोमवार है। best astrologer website allso.in , best matrimonial website vivahallo.in
चंद्र तत्त्व ज्ञान
| तत्त्व | जल | स्वभाव | चर |
| गुण | सत्त्व | संज्ञा | सौम्य, पाप |
| लिंग | स्त्री | वर्णजाति | वैश्य |
| प्रकृति | वात, कफ | कारक | माता |
| धातुसार | खून, वीर्य | अधिष्ठाता | मन |
| पदवी | राजा | शरीर-चिह्न | श्वसनतंत्र, बाजू |
| दिशा | वायव्य | धातु | चाँदी, मणि |
| रत्न | मोती | धारण-समय | सूर्योदय |
| स्वामी | जल | सजल-शुष्क | सजल |
| शुभ भाव | तृतीया भाव | भाव के कारक | चतुर्थ भाव |
| स्थान | जलस्थान | ऋतु | वर्षा |
| मित्र ग्रह | सूर्य बुध | सम ग्रह | मंगल गुरु शुक्र शनि |
| शत्रु ग्रह | उच्च राशि | वृष | |
| नीच राशि | वृश्चिक | मू.त्रि. राशि | वृष |
| महादशा | १० वर्ष | वक्री-मार्गी | मार्गी |
| वृक्ष | पलाश | दृष्टि | सप्तम |