शनि और केतु भाव द्वादश भाव में युति

द्वादश भाव अंत का प्रतीक है। यह राशि चक्र के अंतिम राशि के साथ मेल खाता है। इसलिए, यह भाव सांसारिक यात्रा के अंत और आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत का प्रतिनिधित्व करता है।
यह भाव नींद, कारावास, हानि और अलगाव को भी दर्शाता है। इसलिए, यहां शनि और केतु दोस्तों और परिवार से जातक के अलग होने की संभावना बढ़ाते हैं। उन्हें बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
द्वादश भाव में खर्च को बढ़ा देता है। जातक के लिए अपने बजट का प्रबंधन करना और अपने मौद्रिक प्रवाह को संतुलित करना मुश्किल हो सकता है। shani or ketu ka twelve bhaav
धीरे-धीरे, जातक की वित्तीय समस्याएं उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण विषय बन जाती हैं।

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