आठ मुखी रुद्राक्ष

अष्टमुखी रुद्राक्ष-को भगवान गणेश जी का स्वरूप माना जाता है। अष्टदेवियों का प्रतिनिधि माना गया है। अष्टमुखी रुद्राक्ष राहु के अशुभ प्रभावों से मुक्ति दिलाता है तथा पापों का क्षय करके मोक्ष देता है। यह ज्ञानप्राप्ति, चित्त में एकाग्रता में उपयोगी तथा कोर्ट-कचेरी में विजय प्रदान करने वाला है। अष्टमुखी रुद्राक्ष जो भी मनुष्य धाराण करता है उसके जीवन में आने वाली सभी दुर्घटनाओं तथा प्रबल शत्रुओं से यह रुद्राक्ष रक्षा करता है। अष्टमुखी रुद्राक्ष को विनायक का स्वरूप भी माना जाता है। जीवन में आने वाले सभी विघ्न से मुक्ति प्राप्त करके सभी कार्य में जैसे की व्यापार-उद्योग,नोकरी,सामाजिक, राजकीय,व्यवारिक,कौटुम्बिक सभी कार्य में यह रुद्राक्ष से अच्छी सफलता और उन्नति प्राप्त होती है। यह रुद्राक्ष जातक के शरीर में कुण्डिलिनी चक्र को जाग्रत करता है तथा अष्ट सिद्धि प्रदाता है।
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अष्टमुखी रुद्राक्ष को धारण करते समय "ॐ अष्ट वकत्रस्य ॐ हुं नमः" इस मंत्र की 21 माला जप करना चाहिए। यह रुद्राक्ष को मंत्र जाप के पश्चात धारण करने से परमपद की प्राप्ति होती है।

विशेष :
अष्टमुखी रुद्राक्ष को राहु ग्रह द्वारा शासित रुद्राक्ष भी कहा जाता है। आपके जीवन में आने वाली सभी आपदाओं से सुरक्षा यदि आप शेर बाजार,ट्रेडिंग या ले-वेच या निवेश करते हो यदि आप कोई इलेक्ट्रॉनिक्स चीज वस्तुओ का वेपर-उद्योग करते हो या कोई इलेक्ट्रिक कमपनी या तो इलेक्ट्रिक का छोटा मोटा कार्य करते हो। यदि आप कम्युनिकेशन बिजनेस से जुड़े हो यदि आप बैंक कर्मचारी,चार्टन एकाउंटेंट, इंजीनियर हो तो भी आप यह रुद्राक्ष धारण कर सकते हो। आपकी शारीरिक सभी आपदाओं से मुक्ति प्राप्ति के लिए आप अष्टमुखी रुद्राक्ष धारण कर शक्ति हो।


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