वैशाख शुक्ल तृतीया की महिमा मत्स्यपुराण, स्कंदपुराण, भविष्यपुराण, नारद पुराण व महाभारत आदि ग्रंथो में है । इस दिन किये गये किसी भी पुण्यकर्म अक्षय (जिसका क्षय न हो) व अनंत (जिसका अंत न हो) फलदायी होते हैं, अत: इसे 'अक्षय तृतीया' कहते है, यह सर्व सौभाग्यप्रद है ॥
यह युगादि तिथि यानी सतयुग व त्रेतायुग की प्रारम्भ तिथि है । श्रीविष्णु का नर-नारायण, हयग्रीव और परशुरामजी के रूप में अवतरण व महाभारत युद्ध का अंत इसी तिथि को हुआ था, इसलिए इस दिन विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्रम् के पाठ करना या पंडित जी से करवाना उत्तम हैं ॥
इस दिन बिना कोई शुभ मुहूर्त देखे कोई भी शुभ कार्य प्रारम्भ या सम्पन्न किया जा सकता है । जैसे - विवाह, गृह - प्रवेश या वस्त्र - आभूषण, घर, वाहन, भूखंड आदि की खरीददारी, कृषिकार्य का प्रारम्भ आदि सुख-समृद्धि प्रदायक है ॥ #AkshayTritiya #AkshayTritiya2021 #AkhaTeej #AkshayaTritiya
प्रात: स्नान, देव पूजन, हवन और पितृ तर्पण का महत्त्व
इस दिन गंगा - स्नान करने से सारे तीर्थ में स्नान करने का फल मिलता है, गंगाजी का सुमिरन एवं जल में आवाहन करके ब्रम्हमुहूर्त में पुण्यस्नान तो सभी कर सकते है । स्नान के पश्चात् निम्नलिखित प्रार्थना करें :- #AkshayTritiyaSale #Gold #Jewelry #Astrology #GoodLuck #NewBeginnings #Wealth #Prosperity #Traditions #Culture #Celebrations https://allso.in
माधवे मेषगे भानौं मुरारे मधुसुदन ।
प्रात: स्नानेन में नाथ फलद: पापहा भव ॥
अर्थात् :-
'हे मुरारे ! हे मधुसुदन ! वैशाख मास में मेष के सूर्य में हे नाथ ! इस प्रात: स्नान से मुझे फल देनेवाले हो जाओ और मेरे पापों का नाश करों ॥'
सप्तधान्य उबटन व गोझरण मिश्रित जल से स्नान पुण्यदायी है । चंदन, पुष्प, हल्दी कुमकुम, अक्षत (साबुत चावल मतलब लंबे दानेवाले बासमती चावल) धूप, दीप, केसर और काजू बादाम युक्त पायस नैवेद्य, आदि से लक्ष्मी - नारायण, श्री यंत्र, नवार्ण यंत्र आदि का पूजन व श्वेत तिल - गाय का घी एवं पायस के साथ सूखेमेवे से हवन करना अक्षय फलदायी है ॥
जाप, उपवास व दान का महत्त्व
इस दिन किया गया उपवास, जाप, ध्यान, स्वाध्याय भी अक्षय फलदायी होता है । एक बार हल्का भोजन करके भी उपवास कर सकते है । 'भविष्य पुराण' में आता है कि इस दिन दिया गया दान अक्षय हो जाता है । इस दिन मिट्टी के घड़े में पानी भर के उसका दान, हाथ पंखे का दान, तांबे के घड़े में अनाज भर के उसका दान, सूजी और शक्कर के लड्डू, पादत्राण (स्त्री एवं पुरुष के चप्पल), छाता, जौ, गेहूँ, चावल, गाय, वस्त्र, सुवर्ण (सोना), रजत (चांदी) आदि का दान पुण्य फलदायी है । परंतु दान सुपात्र, विद्वान भूदेव (ब्राह्मण) को ही देना चाहिए ॥
पितृ तर्पण का महत्त्व व विधि
इस दिन पितृ तर्पण करना अक्षय फलदायी है, पितरों के तृप्त होने पर घर में सुख - शांति - समृद्धि व दिव्य संताने प्राप्त होती हैं । https://bestastrologerinindia.allso.in/
विधि :- इस दिन तीर्थ श्राद्ध करके फिर देव, ऋषि, मनुष्य और अपने पितृ ओ का श्वेत तिल, जौ, दुग्ध, चंदन युक्त श्वेत पुष्प, तुलसी, युक्त जल से तर्पण करें, फ़िर भगवान महा विष्णु जी की षोडशोपचार पूजन करें और भगवान विष्णु से पूर्वजों की सदगति हेतु प्रार्थना करें ॥ https://bestpanditinindia.allso.in/
आशीर्वाद पाने का दिन
इस दिन माता - पिता, गुरुजनों की एवं ब्राह्मणों की सेवा कर के उनकी विशेष प्रसन्नता, संतुष्टि व आशीर्वाद प्राप्त करें, इसका फल भी अक्षय होता है ।
अक्षय तृतीया का तात्त्विक संदेश
अक्षय' यानी जिसका कभी नाश न हो, शरीर एवं संसार की समस्त वस्तुएँ नाशवान है, अविनाशी तो केवल परमात्मा ही है, यह दिन हमें आत्म विवेचन की प्रेरणा देता है, अक्षय आत्मतत्त्व पर दृष्टी रखने का दृष्टिकोण देता है, महापुरुषों व धर्म के प्रति हमारी श्रद्धा और परमात्मा प्राप्ति का हमारा संकल्प अटूट व अक्षय हो - यही अक्षय तृतीया का संदेश मान सकते हैं ॥https://bestpanditinindia.allso.in/
अक्षय तृतीया
अक्षय' शब्द का मतलब है जिसका क्षय या नाश न हो, इस दिन किया हुआ जाप, तप, ज्ञान तथा दान अक्षय फल देने वाला होता है अतः इसे 'अक्षय तृतीया' कहते हैं, भविष्यपुराण, मत्स्यपुराण, पद्मपुराण, विष्णुधर्मोत्तर पुराण, स्कन्दपुराण में इस तिथि का विशेष उल्लेख है, इस दिन जो भी शुभ कार्य किए जाते हैं उनका बड़ा ही श्रेष्ठ फल मिलता है, इस दिन सभी देवताओं व पित्तरों का पूजन किया जाता है, पित्तरों का श्राद्ध कर धर्मघट दान किए जाने का उल्लेख शास्त्रों में है, वैशाख मास भगवान विष्णु को अतिप्रिय है अतः विशेषतः विष्णु जी की पूजा, अभिषेकार्चन, सहस्त्रार्चन एवं सहस्त्रनाम स्तोत्रम् के पाठ करें https://bestvastushastriinindia.allso.in/
स्कन्दपुराण के अनुसार, जो मनुष्य अक्षय तृतीया को सूर्योदय काल में प्रातः स्नान करते हैं और भगवान विष्णु की पूजा करके भगवान सत्यनारायण की कथा सुनते हैं, वे मोक्ष के भागी होते हैं, जो उस दिन मधुसूदन की प्रसन्नता के लिए दान करते हैं, उनका वह पुण्यकर्म भगवान की आज्ञा से अक्षय फल देता है ॥ https://onlinepooja.allso.in/
भविष्यपुराण के मध्यमपर्व में कहा गया है वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया में गंगाजी में स्नान करनेवाला सब पापों से मुक्त हो जाता है | वैशाख मास की तृतीया स्वाती नक्षत्र और माघ की तृतीया रोहिणीयुक्त हो तथा आश्विन तृतीया वृषराशि से युक्त हो तो उसमें जो भी दान दिया जाता है वह अक्षय होता है, विशेषरूप से इनमें हविष्यान्न (हरे साबुत मुंग, श्वेत एवं कृष्ण तिल) एवं मोदक देनेसे अधिक लाभ होता है तथा गुड़ और कर्पूर से युक्त जलदान करनेवाले की विद्वान् पुरुष अधिक प्रंशसा करते हैं, वह मनुष्य ब्रह्मलोक में पूजित होता है ॥ यदि बुधवार और श्रवण से युक्त तृतीया हो तो उसमें स्नान और उपवास करनेसे अनंत फल प्राप्त होता हैं | https://bestpanditinindia.allso.in/
अस्यां तिथौ क्षयमुर्पति हुतं न दत्तं ।
तेनाक्षयेति कथिता मुनिभिस्तृतीया ।
उद्दिश्य दैवतपितृन्क्रियते मनुष्यै: ।
तत् च अक्षयं भवति भारत सर्वमेव ।। :– मदनरत्न
अर्थात् :- भगवान श्रीकृष्ण युधिष्ठरसे कहते हैं, हे राजन इस तिथि पर किए गए दान व हवन का क्षय नहीं होता है इसलिए हमारे ऋषि मुनियोंने इसे अक्षय तृतीया कहा है, इस तिथि पर भगवानकी कृपादृष्टि पाने के लिए एवं पित्तरोंकी गतिके लिए की गई विधियां अक्षय एवं अविनाशी होती हैं ॥ https://bestastrologerinindia.allso.in/
भविष्यपुराण, ब्राह्मपर्व, अध्यì