महाशिवरात्रि

💐18 फरवरी को मनाई जाएगी महाशिवरात्रि, गृहस्थ एवं सन्यासी दोनों ही संप्रदाय के लोगों का है महात्योहार शिवरात्रि💐 💐उदयकालिक त्रयोदशी एव प्रदोषकाल चतुर्दशी तिथि का है विशेष संयोग💐 💐 श्री रामेश्वर बैद्यनाथ प्रतिष्ठा दिवस के रूप में भी प्रसिद्ध है महाशिवरात्रि💐 हिंदू जीवन पद्धति दो प्रकार की दिनचर्या वाले लोग होते हैं एक गृहस्थ और दूसरे सन्यासी। गृहस्थ वे कहलाते हैं जो विवाहित दांपत्य जीवन परिवार एवं समाज के साथ व्यतीत करते हुए भगवान की सेवा आराधना एवं पूजा करते हैं तथा सन्यासी वैसे व्यक्ति कहे जाते हैं जो घर परिवार से अलग अविवाहित जीवन जीते हुए भगवान की सेवा आराधना में लीन साधना युक्त आध्यात्मिक जीवन जीते हैं। भगवान शिव इन दोनों ही गृहस्थ एवं सन्यासी लोगों के आराध्य देव माने गए हैं क्योंकि एक तरफ जहां शिव सन्यासी रूप में भगवान केदारनाथ कैलाश में विराजते हैं तो दूसरी ओर भगवान शिव का परिवारिक जीवन गणपति कार्तिक एवं माता गवरी के साथ है है जो काशी में विराजते हैं। सन्यासी जीवन से जनकल्याण लोक कल्याण एवं देव कल्याण हेतु गृहस्थ आश्रम में प्रवेश करने शुरुआत शिवरात्रि से ही होती है। शिवपुराण की प्राचीन कथा के अनुसार महा असुर जालंधर ब्रह्मा जी को तपस्या से प्रसन्न करके अमरत्व का वरदान मांगा जिसके एवज में ब्रह्मा ने किसी अन्य वर मांगने को कहा और जालंधर यह सोच बैठा था कि शिव तो सन्यासी वैरागी है उनका परिवार एवं संतान तो होगा नहीं इसलिए जालंधर ने ब्रह्मा से वरदान मांगा की शिव का पुत्र ही हमारी मृत्यु करें जिस पर ब्रह्मा जी तथास्तु का अंतर्ध्यान हो गए। और इस प्रकार शुरू होती है शिव के सन्यासी से गृहस्थ होने की कथा। इंद्र आदि सभी देव जालंधर के आसुरी प्रवृत्ति से तंग आकर शिव को विवाह हेतु आग्रह किया और शिव कैलाश छोड़कर परिवारिक जीवन माता गौरी के साथ काशी में आकर बिताने लगे। वैसे तो शिवरात्रि चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है परंतु इस वर्ष सूर्योदय से सूर्यास्त के बाद तक त्रयोदशी तिथि ही रहेगी। 18 फरवरी शनिवार को सूर्योदय पूर्व ही त्रयोदशी तिथि का प्रवेश होगा एवं सूर्यास्त के बाद सायं 5:55 तक त्रयोदशी तिथि रहेगी इसके बाद चतुर्दशी तिथि का प्रवेश होगा जो कि दूसरे दिन सूर्योदय तक रहेगा अर्थात यह विहंगम योग त्रयोदशी युक्त प्रदोष काल शिवरात्रि चतुर्दशी का है जो कि धार्मिक एवं आध्यात्मिक दृष्टिकोण से अत्यधिक महत्वपूर्ण एवं उत्तम फलदाई है। शिव पुराण के अनुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष चतुर्दशी तिथि को काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग की प्रतिष्ठा हुई थी एवं फाल्गुन शुक्ल पक्ष शिवरात्रि चतुर्दशी के दिन श्री रामेश्वर वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की प्राण प्रतिष्ठा हुई है इसलिए इस दिन ज्योतिर्लिंग के साथ अन्य शिव मंदिर शिवलिंग ओ में पूजन अर्चन अभिषेक रात्रि जागरण संकीर्तन अत्यंत लाभकारी एवं पुण्य देने वाला होता है *प्रकृति उपासना के द्योतक भी है शिव* शिव की पूजा आराधना में प्रयुक्त होने वाला सबसे आवश्यक गंगा या पवित्र नदी का जल है जल के बिना शिव की पूजा अकल्पनीय है साथ ही पूजा ने प्रयुक्त होने वाली अन्य सामग्री में महत्वपूर्ण रुप से बेलपत्र भांग धतूरा कनेल आकान शमी का पुष्प और दूर्वा है। यह सभी सामग्री हमें पर्यावरण प्रकृति से मिलती है जो कि इस बात का द्योतक है कि शिव नदी पर्यावरण संरक्षण के द्योतक भी है। *क्या है ज्योतिषीय महत्व* ज्योतिष शास्त्र के मान्यताओं के अनुसार इस संसार के जितने भी लोग हैं वह वह सभी लोग 12 राशियों में ही उत्पन्न हुए हैं एवं इस पृथ्वी पर ज्योतिर्लिंगों की संख्या 12 ही है यह 12 ज्योतिर्लिंग अलग-अलग राशियों का प्रतिनिधित्व करता है जोकि ग्रह आदि पीड़ित एव प्रभावित लोगों के लिए शांति प्राप्त होता है। कैसे करें पूजन महाशिवरात्रि व्रत में उपवास युक्त दिन व्यतीत करना चाहिए एवं विविध कामनाओं की पूर्ति के लिए अलग-अलग प्रकार के तरल पदार्थों से शिवलिंग के ऊपर शुक्ल यजुर्वेद के रुद्राष्टाध्याई का पाठ करते हुए रुद्राभिषेक एवं श्रृंगार पूजन पंचामृत पूजन करना चाहिए। रोग मुक्ति के लिए कुश मिश्रित जल धन धान्य समृद्धि हेतु एक के रस से सर्व प्रकार की मनोकामना सिद्धि हेतु दुग्ध धारा से ऐश्वर्या एवं रूप गुण संपन्नता हेतु सुगंधित गुलाब जल से शनि राहु आदि पाप ग्रहों से मुक्ति हेतु तिल तेल से रुद्राभिषेक करना उत्तम रहता है। इसी प्रकार मांगलिक दोष युक्त कन्याओं के लिए अथवा मांगलिक दोष दांपत्य जीवन वाले पति पत्नियों को शक्कर के बने हुए शिवलिंग पर रुद्राभिषेक पूजन करना चाहिए। शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी शिव वास तिथि के अंतर्गत नहीं आती है इसलिए महाशिवरात्रि के दिन पार्थिव पूजन नहीं करते हुए प्रतिष्ठित शिव मंदिर में शिव का पूजन एवं अर्चन करना उत्तम होता है। प्रदोष काल में शिव का पूजन अभिषेक अत्यंत कल्याण एवं शुभप्रद होता है। महाशिवरात्रि के रात्रि काल में व्रत करने वाले को रात्रि जागरण करना चाहिए एवं मंगल कीर्तन गाते हुए शिव की आराधना करनी चाहिए। *आचार्य अविनाश शास्त्री* *फलितज्योतिषाचार्य* कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय, दरभंगा *माध्यमिक शिक्षक* माध्यमिक विद्यालय,गौरा सम्पर्क:-8271569010 avinashsashtri@rediffmail.com @avinashsashtti

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