नवमुखी रुद्राक्ष नवशक्ति और नवदुर्गा का प्रतिनिधि माना गया है। इसे भैरव और यम का स्वरूप भी माना जाता है। इसे बाईं भुजा में धारण करने से गर्भहत्या जेसे पाप से मुक्ति मिलती है। यह केतु के अशुभ प्रभावों को दूर करता है।इसके अलावा इसे नवदुर्गा, नवनाथ, नवग्रह का भी प्रतीक भी माना जाता है। यह धारक को नई-नई शक्तियाँ प्रदान करने वाला तथा सुख-शांति में सहायक होकर व्यापार में वृद्धि कराने वाला होता है।
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इसके धारक की अकालमृत्यु नहीं होती तथा आकस्मिक दुर्घटना का भी भय नहीं रहता। नवमुखी रुद्राक्ष को धारण करते समय कच्चे दूध और चन्दन केसर के जल से अभिषेक कर के "ॐ नव वकत्रस्य ॐ ह्रीं हुं नमः" इस मंत्र की 21 माला जप कर के धारण चाहिए। यह रुद्राक्ष को मंत्र जाप के पश्चात बायीं भुजा में धारण करने से सुख-शांति और व्यापार में वृद्धि की प्राप्ति होती है।
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यह नवमुखी रुद्राक्ष धारण कर ने से कर्क रोग दूर होता है। आध्यात्मिकता मर अच्छी सफलता मिलती है और बुद्धि में भी विकास होता है। यह नवमुखी रुद्राक्ष डॉक्टरों,वैध,सर्जन भी धारण कर सकते है। पुलिस कर्मचारी,जो गवर्मेंट कर्मचारी है धारण कर सकते है।