तीन मुखी रुद्राक्ष को अग्नि देव तथा त्रिदेवों का स्वरुप माना गया है। तीन मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है तथा जीवन के सभी पापों का शमन होता है। सत्वगुण, रजोगुण और तमोगुण- इन तीनों गुणों और तीनो गुणों ली शक्ति महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती त्रिगुणात्मक शक्तियों का स्वरूप और ब्रह्मा,विष्णु और भगवान रूद्र का स्वरुप भी माना गया है। यह तीन मुखी रुद्राक्ष जातक के जीवन का भूतकाल,भविष्यकाल और वर्तमानकाल का ज्ञान देने वाला है। इसे धारण करने वाले मनुष्य की विध्वंसात्मक प्रवृत्तियों का दमन होता है और रचनात्मक प्रवृत्तियों का उदय होता है। जो भी जातक यह तीन मुखी रुद्राक्ष धारण करता है तो उसके जीवन में आध्यात्मिकता का प्रभाव पड़ता है और जीवन में आने वाली सभी प्रकार की व्याधि दूर हो जाती ही और आप के जीवन में जीवन में आने वाली सभी प्रकार की दुविधा दूर होती है तीन मुखी रुद्राक्ष को मंगल ग्रह का प्रतिक माना गया है।
इस तीनमुखी रुद्राक्ष की जानकारी वीडियो के रूप में देखें
तीन मुखी रुद्राक्ष धारण करने से जातक के जीवन में बीमारी और कमजोरी दूर हो जाती है । यदि आपके शरीर में पीलिये का रोग है और आप यह रुद्राक्ष धारण करते हो तो आप को अत्यंत लाभदायक है। व्यक्ति क्रियाशील रहता है। यदि किसी की नौकरी नहीं लग रही हो, बेकार हो तो यदि वो तीन मुखी रुद्राक्ष धारण करता है तो निश्चय ही कार्य में सिद्धी होती है। तीन मुख वाला रुद्राक्ष सफलता दिलाने वाला होता है। तीन मुखी रुद्राक्ष को धारण करते समय -"ॐ त्रि वकत्रस्य ऊं क्लीं नम: " इस मंत्र की 21 माला जप करके मंगलवार के दिन धारण करना चाहिए
विशेष :
मेष और वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल है । इसीलिए मेष और वृश्चिक राशि के जातक यदि तीन मुखी रुद्राक्ष धारण करते है तो जीवन में अच्छे फल की प्राप्ति होती है। मैनेजमेंट या मार्केटिंग व्यवसाय से सम्बन्ध रखने वाले व्यक्तियों को तीन मुखी रुद्राक्ष अवश्य धारण करना चाहिए।इस पहनने वाले व्यक्ति उच्च शिक्षित बन सकते है।और जो डॉक्टर वैद्य और सर्जन है वो सभी जातक को भी तीन मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए
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