धनिष्ठा नक्षत्र

धनिष्ठा नक्षत्र अक्टुम्बर महीने के पहले पक्ष में आकाश में रात 9:00 से 11:00 बजे दिखाई देता है यह नक्षत्र 5 तारो से बना हुआ है इसका स्वरुप आकाश में चक्र जैसा दिखाई देता है मकर राशि धनिष्ठा नक्षत्र प्रथम व द्वितीय चरण मकर राशि 23 अंश 20 कला 30 अंश तक होता है कुम्भ राशि धनिष्ठा नक्षत्र तृतीय व चतुर्थ चरण– कुम्भ राशि 0 अंश से 6 कला 40 अंश तक होता है

मकर राशि धनिष्ठा नक्षत्र का स्वभाव:

धनिष्ठा नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक का दानी, धनी, सचेत, सक्रिय, साहसी, प्रभावशाली, महत्वाकांक्षी, दृढ़प्रतिज्ञ परन्तु लालची, स्वार्थी प्रतिशोधात्मक, आक्रामक, नपुंसक।

कुम्भ राशि धनिष्ठा नक्षत्र का स्वभाव:

धनिष्ठा नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक का धनी, दानी, धर्मावलम्बी, समाजप्रिय, हाजिर जवाब, वैज्ञानिक एवं अनुसन्धानात्मक प्रवृत्ति, परन्तु लोभी, क्रोधी, लड़ाकू

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मकर राशि धनिष्ठा नक्षत्र व्यवसाय:

धनिष्ठा नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक आयुर्वेद, होम्योपैथी, अस्थि विशेषज्ञ, खान व भूमिगत कार्यों का इन्जीनियर, श्रम, पुनर्वास विभाग, मृत्युकर संग्रह, जेल विभाग, उद्योग, उपकरण, स्पेयर पार्ट्स, जस्ता, सीमेन्ट, धातु सीसा, शराब, जूट आदि से सम्बन्धित व्यवसाय, बूचड़खाना।

कुम्भ राशि धनिष्ठा नक्षत्र व्यवसाय:

धनिष्ठा नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक – दूरदर्शन, दूरभाष, तार, विद्युत, अणुशक्ति, अनुसंधान केन्द्र, संदेशवाहन, न, मुद्रणालय, अन्वेषक, कृषि, चाय, रेशम, जूट, खान कोयला, लौह स्टील, चमड़ा खाल, पुलिस मिलिटरी, पोस्टमार्टम, भूचाल, दंगों व युद्ध के पीड़ितों को सहयोग ।

मकर राशि धनिष्ठा नक्षत्र रोग:

धनिष्ठा नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक के जीवनमें टांग में फ्रेक्चर, रक्त विचार, रक्तोष्णता, धड़कन, मूर्च्छा, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, स्नायुगुच्छ ( वेरीकोज) रोग ।

कुम्भ राशि धनिष्ठा नक्षत्र रोग:

धनिष्ठा नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक के जीवनमें टांग में फ्रेक्चर, रक्त विचार, रक्तोष्णता, धड़कन, मूर्च्छा, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, स्नायुगुच्छ ( वेरीकोज) रोग ।

धनिष्ठा नक्षत्र मकर राशीश शनि

धनिष्ठा नक्षत्र कुम्भ राशीश शनि

• नक्षत्र अंग – घुटने का ढक्कन– टखने, पिंडली, भुजाएं • नक्षत्र वृक्ष शमी और सेमर है । • नक्षत्र रंग - लाल • नक्षत्र तत्व - पृथ्वी • नक्षत्र गणना - शुभ

• नक्षत्र स्वामी - मंगल • नक्षत्र के देवता - वशु • नक्षत्र मंत्र - ॐ धनिष्ठायै नमः

धनिष्ठा मकर राशि

• वर्ण: वैश्य • वशय: जलचर • योनि : सिंह • गण:राक्षस • नाड़ी:मध्य

धनिष्ठा कुम्भ राशि

• वर्ण :सूद्र • वशय: मानव • योनि : सिंह • गण:राक्षस • नाड़ी: मध्य

नक्षत्र साधना उपासना

धनिष्ठा नक्षत्र के प्रथम व द्वितीय चरण मकर राशि तृतीय व चतुर्थ चरण– कुम्भ राशि में आते है इस चरण के अनुशार साधना उपासना करने से अच्छा लाभ प्राप्त होता है

प्रथम चरण का स्वामी : रवि

गायत्री मंत्र जप और महामृतुन्जय मंत्र जप

द्वितीय चरण का स्वामी : बुध

गायत्री मंत्र जप और हवन

तृतीय चरण का स्वामी : शुक्र

गायत्री मंत्र जप

चौथे चरण का स्वामी : मंगल

सूर्य मंत्र एवं उपासना

Special Tips:

धनिष्ठा नक्षत्र में जन्म धारण करने वाले जातक को मृगशिरा - चित्रा धनिष्ठा इन तीन नक्षत्र में कोई भी अच्छा कार्य नहीं करना चाहिए


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